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यह समय भी कट जायेगा
बहुत समय पहले की बात है, एक बार कुछ साधू विचरण करते हुए एक राजा के दरबार में पहुँच जाते हैं। राजा ने पूरे मन से उन साधुओं का अतिथि सत्कार किया। सभी साधू राजा से बहुत प्रसन्न हुए और वापस जाते वक्त साधुओं के गुरु ने राजा को एक ताबीज दिया और बोले, “राजन, इस ताबीज को हमेशा अपने गले में डालकर रखना। भविष्य में कभी भी आपके ऊपर कोई भी संकट आये और कोई रास्ता न सूझे, जब तुम्हें लगे कि अब तो सब कुछ ख़तम हो जायेगा, तो ये ताबीज खोलकर इसमें रखे कागज को पढ़ना।” यह कहकर साधू आगे चले गए। राजा ने महात्मा के द्वारा दिया गया ताबीज गले में डाल लिया।
एक दिन राजा कुछ सैनिकों के साथ जंगल में शिकार करने निकले। जंगल में एक शेर का पीछा करते -करते राजा अपने सैनिकों से कब अलग हो गए, उन्हें पता ही न चला। वह घने जंगल में बहुत दूर आगे निकल गये और शिकार भी हाथ न लगा। तभी अचानक उन्होंने देखा कि वो तो अपने राज्य की सीमा पारकर अपने शत्रु की सीमा में पहुँच गये। वह सोच ही रहे थे कि उन्हें शत्रुओं के सैनिकों की आहट हुई। अब राजा के होश उड़ गये, वे तुरंत अपने घोड़े पर सवार होकर घने जंगल की तरफ भागने लगे। दुश्मन सैनिक राजा के पीछा करने लगे।
काफी दूर भागने के बाद घने जंगल में राजा को एक गुफा दिखाई देती है। वह तेजी से गुफा की तरफ जाते हैं और घोड़े के साथ उस गुफा के पीछे छुप जाते हैं। शत्रु सैनिक जैसे – जैसे नजदीक आते हैं, उनके घोड़ों की टापें राजा के कान में तेजी से चुभने लगीं। राजा सांस रोककर चुपचाप छुपकर बैठ गया। उसे अपनी मौत दिखाई देने लगी। उसने सोच कि कभी भी दुश्मन सैनिक उसे मार देंगें। वह अपनी जिन्दगी से बिलकुल निराश हो गया था। तभी अचानक उसका हाथ गले में पड़े ताबीज पर पड़ता है। और उसे साधू की बात याद आ जाती है।
उसने तुरंत ताबीज खोलकर कागज बहार निकाला और उसे पढ़ा। उस कागज में लिखा था, “यह भी कट जायेगा।” अब राजा को अचानक घने अंधकार में जैसे कोई ज्योति की किरण दिख गई हो !, जैसे डूबते को किसी तिनके का सहारा मिल गया हो ! उसको अपनी अंतरात्मा में एक अभूतपूर्व शांति महशुस हुई। उसको लगा कि यह बुरा समय भी कट ही जायेगा फिर मैं क्यों व्यर्थ ही चिंता करूँ? और अंत में यही हुआ, दुश्मन के घोड़ों के टापों की आवाजें धीरे – धीरे कम होने लगीं और कुछ ही देर में वहां पर शांति छा गई। राजा रात में ही गुफा से निकलकर अपने राज्य में वापस आ गया।
मोल भाव
 
अपना काम समाप्त कर ऑफिस से बहार निकल कर शर्माजी ने स्कूटर स्टार्ट किया और घर के ओर रवाना हो ही रहे थे कि अचानक उन्हें याद आया सुबह घर से निकलते समय पत्नी ने कहा था, “आज मंगलवार है, बाकी फल तो है, केले खतम हो गए हैं, ऑफिस से आते समय 1 दर्ज़न केले लेते आना। शर्माजी ने घड़ी देखी तो शाम के 6 बज़ रहे थे, आज काम भी ज्यादा था, अफसरों के साथ मीटिंग भी थी, इस कारण घंटा भर देर हो गयी। सोचते-सोचते थोड़ी दूर ही गए थे, तभी उन्होंने सड़क किनारे बैठ कर टोकरी में बड़े और ताज़ा केले बेचते एक बीमार से दिखने वाली दुबली-पतली बुढ़िया दिख गयी, वैसे तो वह फल हमेशा स्टेशन रोड पर “राम आसरे फ्रूट भण्डार” से ही लेते थे, पर आज उन्हें लगा, अब तक राम आसरे के यहाँ ऑफिस से घर लौटते समय खरीददारी करने वालों की काफी भीड़ हो गयी होगी, एक दर्जन केलों की ही तो बात है, क्यों समय खराब करूँ ?
क्यों न बुढ़िया से ही खरीद लूँ ? उन्होंने बुढ़िया के सामने स्कूटर रोका और बुढ़िया से पूछा, “माई, केले कैसे दिए? “बुढ़िया बोली, बाबूजी बीस रूपये दर्जन, शर्माजी तुरंत बोले, “माई, इतने महंगे क्यों बता रही हो, ठीक भाव लगाओ, 15 रूपये दूंगा, बुढ़िया ने उत्तर में कहा, “बाबूजी 15 में तो घर में ही नहीं पड़ते, अट्ठारह रूपये दे देना, दो पैसे मैं भी कमा लूंगी, शर्माजी तपाक से बोले, रहने दे 15 रूपये लेने हैं तो बोल नहीं तो रहने दे। बुझे चेहरे से बुढ़िया ने, “न” में गर्दन हिला दी, शर्माजी ने स्कूटर स्टार्ट किया और आगे बढ़ चले, थोड़ी दूर पर उन्हें एक ठेलेवाला नज़र आया, उन्होंने ठेले के पास ही स्कूटर खड़ा किया, और केलों का भाव पूछा ?
ठेलेवाला बोला बाबूजी बहुत अच्छे हैं, शहर में कहीं ऐसे केले नहीं मिलेंगे,भाव भी बहुत कम 22 रूपये के दर्जन, शर्माजी ने मुंह बिचकाया और खीजते हुए बोले, अरे 18 रूपये में तो पीछे छोड़ कर आया हूँ, ठेलेवाले ने सुना अनसुना करते हुए जवाब दिया, वहीँ से ले लेते, छोड़ कर क्यों आये ? “शर्माजी ने केलेवाले को घूरते हुए, बिना कुछ कहे स्कूटर स्टार्ट किया और आगे चल पड़े। राम आसरे फ्रूट भण्डार पर स्कूटर खड़ा किया तो उम्मीद के अनुसार वहां लम्बी लाइन लगी थी। अपनी बारी की प्रतीक्षा करते करते शर्माजी सोचने लगे, “बेकार ही समय खराब किया इससे तो पहले ही यहाँ आ जाता समय खराब नहीं होता, अभी तो घर जाकर मंदिर भी जाना है।
तब तक बहुत देर हो जायेगी। शर्माजी का नंबर आने पर, जब उन्होंने केले का भाव पूछा तो राम आसरे बोल उठा, “शर्माजी आप कब से भाव पूछने लगे?” 24 रूपये दर्जन हैं ले जाओ, कितने दर्जन दूँ ? शर्माजी झुंझलाते हुए बोले, अरे लूट मचा रखी है क्या? रोज का ग्राहक हूँ, 5 साल से सारे फल तुमसे ही खरीदता हूँ, एक घर तो डायन भी छोड़ देती है, ठीक भाव लगाओ, राम आसरे ने कहा तो कुछ नहीं पर ऊँगली से सामने लगे बोर्ड की ओर इशारा कर दिया, बोर्ड पर लिखा था- “मोल भाव करने वाले माफ़ करें।”
शर्माजी को राम आसरे का यह व्यवहार बहुत बुरा लगा, उन्होंने ने भी कुछ कहे बिना दुकान से विदाई ली और कुछ सोचकर स्कूटर को वापस ऑफिस की ओर मोड़ दिया। मन ही मन वह खुद ही कोसने लगे, क्यों आज तक ऊंची दुकान के चक्कर में वह राम आसरे के हाथों मूर्ख बनते रहे ? अब तक पता नहीं कितना खुद का कितना नुकसान कर दिया होगा? सोचते-सोचते वह बुढ़िया के पास पहुँच गए, उन्होंने स्कूटर खड़ा किया और गौर से देखा तो बुढ़िया की टोकरे में उतने ही केले नज़र आये जितने उन्होंने पौन घंटे पहले देखे थे।
शर्माजी को सामने देख कर बुढ़िया ने उन्हें पहचान लिया, उसके बुझे चेहरे पर आशा की हलकी सी चमक दिखाई देने लगी, उसने धीमी मगर स्पष्ट आवाज़ में पूछा “बाबूजी एक दर्जन केले दे दूँ, पर 18 रूपये से कम नहीं ले पाऊँगी, शर्माजी ने मुस्कराकर कहा, “माई, एक दर्ज़न नहीं दो दर्जन दे दो और भाव की चिंता मत करो। “बुढ़िया का चेहरा खुशी से दमकने लगा, केलों को बिना थैली के शर्माजी के हाथ में पकड़ाते हुए बोली- “बाबूजी मेरे पास थैली नहीं है, सुबह मंडी से आठ दर्जन केले लायी थी, अभी तक दो दर्जन ही बिक़े हैं, एक टाइम था जब मेरा आदमी जिन्दा था, मेरी भी छोटी सी दुकान थी सब्ज़ी, फल सब मिलता था उस पर, आदमी की बीमारी में दुकान बिक गयी, आदमी भी नहीं रहा, अब खाने के भी लाले पड़ रहे हैं, किसी तरह पेट पाल रही हूँ, कोई औलाद भी तो नहीं है जिसकी ओर मदद के लिए देखूं।
अब कमज़ोरी और उम्र के कारण ज्यादा मेहनत भी तो नहीं होती, इतना कहते-कहते बुढ़िया रुआंसी हो गयी, शर्माजी भी बिना कुछ कहे हाथ में केले लिए खड़े-खड़े बुढ़िया की बात सुनते रहे, बुढ़िया की बात समाप्त होने के बाद, शर्माजी ने जेब से 50 रूपये का नोट निकाला और दोनों हाथों से बुढ़िया के हाथ में थमाते हुए स्कूटर की ओर मुड़े ही थे कि, उन्हें बुढ़िया की आवाज़ सुनायी दी “बाबूजी मेरे पास छुट्टे नहीं हैं, आप के पास 36 रूपये खुले हो तो दे दो। शर्माजी तुरंत वापस मुड़े और बोले- “माई चिंता मत करो, रख लो, अब मैं रोज़ तुमसे ही फल खरीदूंगा। अभी तो जेब में पैसे नहीं हैं, कल तुम्हें 500 रूपये दे दूंगा, धीरे-धीरे चुका देना, और परसों से बेचने के लिए मंडी से दूसरे फल भी ले आना। बुढ़िया कुछ कह पाती उसके पहले ही शर्माजी स्कूटर से घर की ओर रवाना हो गए।
घर पहुँचते ही जब पत्नी कौशल्या ने देरी से आने का कारण पूछा तो, शर्माजी ने पूरी घटना सुनाते हुए कहा, “मुझे सदा से ही एक गलतफहमी थी, अच्छा सामान बड़ी दुकान पर ही मिलता है, पर आज मेरी यह गलतफहमी दूर हो गयी, न जाने क्यों हम हमेशा मुश्किल से पेट पालने वाले, थड़ी लगा कर सामान बेचने वालों से मोल भाव करते हैं, बड़ी दुकानों पर मुंह मांगे पैसे दे आते हैं, शायद हमारी मानसिकता ही बिगड़ गयी है, गुणवत्ता के स्थान पर हम चकाचौंध पर अधिक ध्यान देने लगे हैं। अब देखो न, केले बड़े ही नहीं ताज़ा भी हैं और बाजार भाव से सस्ते भी। पत्नी कौशल्या की भी आँखें खुल गयी, वह भी कहने लगी, “यह बात तो मैंने भी कभी नहीं सोची, आप ठीक कह रहे हो आज से मैं भी इस बात का ध्यान रखूंगी।
अगले दिन शर्माजी ने बुढ़िया से किया अपना वादा निभाया, उसे 500 रूपये देते हुए कहा, “माई लौटाने की चिंता मत करना, धीरे-धीरे जो फल खरीदूंगा, उनकी कीमत से ही चुक जाएंगे। जब शर्माजी के ऑफिस के साथियों को किस्सा बताया तो उसके बाद से सबने बुढ़िया से ही फल खरीदना प्रारम्भ कर दिया। तीन महीने बाद ऑफिस के लोगों ने स्टाफ क्लब की ओर से बुढ़िया को एक हाथ ठेला भेंट कर दिया। बुढ़िया भी अब प्रसन्न है, उचित खान-पान के कारण उसका स्वास्थ्य भी पहले से बहुत अच्छा है। हर दिन शर्माजी और ऑफिस के दूसरे लोगों को दुआ देती है। शर्माजी के मन में भी अपनी बदली सोच और एक असहाय निर्बल महिला की सहायता करने के कारण संतुष्टि का भाव रहता है। अब जो भी मिलता है उसे अपने साथ घटित घटना को बताना नहीं भूलते साथ ही उन्हें इस सन्देश को और लोगों तक पहुंचाने के लिए भी कहते हैं।
 
 
जो होता है अच्छे के लिए ही होता है
 
बहुत समय पहले की बात है एक राजा के मंत्री भगवान के बहुत बड़े भक्त थे, किसी भी बात पर वो यही कहते भगवान जो करेंगे अच्छा करेगें। एक दिन राजा का बेटा मर गया मंत्री को जब पता चला तो उसने कहा प्रभु भला करेंगें। राजा को यह बात सुनकर बहुत बुरा लगा, लेकिन उसने मंत्री को कुछ नहीं कहा। कुछ दिनों के बाद राजा की रानी की मृत्यू हो गई मंत्री ने फिर कहा भगवान भला करेंगें। राजा फिर चुप रहा उसने मंत्री को कुछ नहीं कहा।
राजा एक दिन अपनी तलवार की धार को उंगली से देख रहा था और धोखे से उसकी उंगली कट गई। मंत्री ने फिर वही वाक्य दोहराया राजा को इस बार बहुत गुस्सा आया और उसने मंत्री को देश से बाहर निकाल दिया। मंत्रीजी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें और कहाँ जाये। अब वह जंगल की ओर की चल दिये। एक दिन राजा जंगल में शिकार खेलने गया वहां वह जंगल में डाकुओं के बीच फंस गया। उस समय वहां काली उपासना का पर्व मनाया जा रहा था और इस पर्व पर काली मां को नर बलि चढाने की प्रथा थी।
अब बलि के लिए जंगल में कुछ नहीं मिल रहा था कि अचानक उनकी नजर राजा पे पड़ी। अब डाकुओं ने राजा को पकड़कर उन्हें बंदी बना लिया और सोचा की राजा की ही बलि क्यों न चढा दी जाए। बलि चढ़ाते समय पुरोहित ने पूछा कि तुम्हारे परिवार में कौन-कौन है राजा ने कहा कोई नहीं। तभी पुरोहित ने देखा कि राजा की उँगुली कटी है, उन्होंने तुरन्त मना किया कि इस आदमी की बलि नहीं दी जा सकती क्योंकि एक तो इसके परिवार में कोई नहीं है और इसका अंग भी भंग है। राजा वहां से वापस महल में गया और सोचने लगा कि मंत्री ठीक कहता था कि जो होता है अच्छे के लिए होता है।
राजा ने तुरंत अपने सिपाहियों को आदेश दिया कि मंत्री को जल्दी से जल्दी ढूँढ़कर सम्मान के साथ महल में वापस लाओ। सिपाही मंत्री को ढूँढ़कर लाते हैं और राजा ने मंत्री से माफ़ी माँगी और सम्मान के साथ महल में ले गए।
 
बच्चों को इन ऐप्स से बनाएं स्मार्ट, घर बैठ कराएं प्ले-ग्रुप की पढ़ाई
 
 
अल्‍फाबेट ऐप (Learning Letters Puppy)
गूगल प्ले स्टोर पर एंड्रॉइड यूजर्स के लिए ऐसी कई ऐप्स मौजूद हैं, जो बच्चों को गेम्स के बहाने इंग्लिश, मैथ और साइंस जैसे सब्जेक्ट का ज्ञान दे सकते हैं। इतना ही नहीं, वो जानवरों के नाम और पहचान के साथ पजल गेम्स के जरिए उन्हें बनाना भी सीख सकता है। ये ऐप्स आपके बच्चे को स्मार्ट बना देंगी। कुछ ऐसे ही ऐप्स के बारे में हम आपको बता रहे हैं।
 
गेम्स ऐप (Educational Games for Kids)
बच्चों को गेम्स के सहारे कुछ भी सिखाया जा सकता है। गेम्स ना सिर्फ उनका मन बहलाते हैं, बल्कि उनका दिमाग भी तेज करते हैं। साथ ही, गेम्स के जरिए उन्हें काफी कुछ सीखने का मौका मिल जाता है। ऐसे में Educational Games for Kids ऐप डाउनलोड करें। इस ऐप में कलर, शब्द, एनिमल, मैथ्स, लेटर्स और नंबर्स, शेप्स के साथ बहुत कुछ दिया है। यानी इस एक ऐप से आप बच्चों को गेम्स के बहाने कई चीजों का ज्ञान दे सकते हैं। 6.9MB साइज की ये ऐप आपके स्मार्टफोन में आसानी से इंस्टॉल हो जाएगी।
ये एक फनी ऐप है जिसमें ढेरों पपी कैरेक्टर, एनिमेशन, साउंड इफेक्‍ट दिए गए हैं। इसमें खेलने के चार मॉडल जिए गए हैं। इसकी मदद से आप बच्चे को ABC, 123, शेप्स और कलर्स के बारे में बता सकते हैं। इन सभी के साथ इसमें म्यूजिक भी है, जो बच्चों का मन बहलाने के काम आता है। इस ऐप का साइज 24MB है। ऐसे में इसके लिए आपके स्मार्टफोन में जगह होना जरूरी है।
 
एजुकेशनल ऐप (Toddlers Education Kit)
इस ऐप में बच्चों को सिखाने के लिए कई चीजें है। यानी इस ऐप की मदद से आप फ्रूट्स, एनिमल, म्यूजिक नोट्स, कलर्स, नंबर्स, लेटर्स, शेप्स के बारे में बता सकते हैं। किट एजुकेशनल में बच्‍चों के लिए ढेरों गेम्स भी हैं। जिससे वे फन के साथ नई चीजें सीखते हैं। इस ऐप का साइज 22MB है।
 
लर्निंग किट ऐप (Complete Kiddos' Learning Kit)
इस ऐप में बच्चों के लिए कम्पलीट लर्निंग किट दी गई है। इसकी मदद से फ्रूट्स, एनिमल, म्यूजिक नोट्स, कलर्स, नंबर्स, लेटर्स, शेप्स के बारे में बच्चा आसानी से सीख सकता है। सबसे अच्छी बात ये है कि इस ऐप से आपका बच्चा स्कूल में होने वाली प्ले-ग्रुप, नर्सरी की पढ़ाई तक सीख सकता है।
 
एनिमल ऐप (QCat - Toddler's Animal Park)
ये ऐप पूरी तरह एनिमल को ध्यान में रखकर बनाई गई है। इसमें ऐप में फनी कलर्स के साथ जानवरों की फोटोज दी गईं हैं। बच्‍चों को जानवरों की तस्वीरें आकर्षित करती हैं। ऐसे में उन्हें आपके स्मार्टफोन पर इन्हें देखकर खेलने में मजा भी आएगा। इस ऐप का साइज 11MB है।
 
प्री स्‍कूल ऐप (Preschool Learning Games Train)
प्री स्‍कूल गेम ट्रेन में ढेरों ग्राफिक दिए गए हैं, जो आपके बच्‍चों को पसंद आएंगे। इस ऐप में एजुकेशनल टूल के साथ बच्‍चों की कई बेसिक जानकारियां दी गईं हैं। यानी इस ऐप की मदद से आपका बच्चा स्मार्ट और इंटेलिजेंट हो सकता है। ऐप का साइज 21MB है।
 
पजल ऐप (Underwater Jigsaw for Toddlers)
बच्चे जब स्कूल जाना शुरू करते हैं, तो प्ले ग्रुप में अक्सर उन्हें पजल जैसे गेम खिलाए जाते हैं। ऐसे में पजल ऐप बेहद काम की ऐप हो जाती है। इसमें कई सारे फोटोज के पजल दिए हैं। ऐसे में बच्चा जब पजल से तस्वीर बनाएगा, तो उनका दिमाग तेज होगा। इस ऐप का साइज 29MB है।
 
 
वेट एजुकेशन ऐप (toddlers education kit)
गूगल प्ले स्टोर पर बच्चों की एजुकेशन देने के लिए कई गेम्स किट दी गई हैं। वेट एजुकेशन ऐप की मदद से आप बच्चों को काउंटिंग, मैथ, कलर, शेप पहचानना सिखा सकते हैं।
 
एबीसी ऐप्स (ABC Plus)
इस ऐप को बच्चों के लिए शानदार ग्राफिक्स के साथ डिजाइन किया गया है। इस ऐप की सबसे अच्छा बात ये है कि बच्चों को प्रोफेशनल तरीके से सारी चीजें सिखाती है। इसमें मैथ्स के छोटे-छोटे सवालों के साथ कई दूसरी चीजें दी गई है। जो आपके बच्चे को टीचर की तरह पढ़ाने का काम करेगी। इस ऐप का साइज 40MB है।
 
मिक्स मैच ऐप (Matching game for toddler Free)
मिक्स मैच ऐप में गेम्स के साथ कई एजुकेशनल वीडियो दिए गए हैं। इसके अलावा कलर मैच, नंबर काउंट जैसे कई दूसरे गेम्स दिए गए हैं। इस ऐप का साइज 47MB है।
 
दो साल से ऊपर के शिशुओं के लिए दोपहर की नींद हानिकारक
एक नई रिसर्च से पता चला है कि शिशु के लिए दोपहर की झपकी या नींद उसके सोने की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है. दोपहर की झपकी या नींद से शिशु की रात की नींद के समय पर प्रभाव पड़ता है.
ऑस्ट्रेलिया की क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ता केरेन थोर्पे ने बताया कि उनकी टीम यह पता लगा रही थी कि शिशुओं की दोपहर की नींद से उनकी रात की नींद की गुणवत्ता, उनके व्यवहार और शारीरिक स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है.
 
रिसर्च के बाद पाया गया कि दो साल से ऊपर के बच्चों में दोपहर की नींद का प्रभाव उनकी रात की नींद पर पड़ता है. शरीर के सही विकास, व्यवहार और पूरे स्वास्थ्य पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभावों में दोपहर की नींद भी शामिल है.
 
यह अध्ययन जर्नल 'अर्काइव्स ऑफ डिजीज इन चाइल्डहुड' के ऑनलाइन संस्करण में प्रकाशित हुआ है.
मेहनत के 5 रु
 एक गाँव मे एक परिवार था उस परिवार मे चार सदस्य रहते थे ,जिसमे माँ, पिता ओर उनके दो पुत्र थे।उन दो पुत्रो के नाम राम और श्याम थे। राम बहुत मेहनती , परिश्रमी था अथवा वह परिवार का पेट भरने के लिए गांव से दूर नौकरी भी करता था। श्याम उतना ही उसके विपरित था। उसे परिवार और उसकी अपेक्षाओ कि ना ही चिंता थी ना ही परिवार के लिए करने की कुछ लालसा । पिताजी को यह देखकर बहुत बुरा लगता था। एक दिन पिताजी के मन मे एक ख्याल आया क्यो न श्याम को सबक सिखाया जाए। उन्होने श्याम  को एक दिन खाना खाते समय डांट कर यह कहा की अगर कल से घर मे तुम पैसे नही लाए तो रोटी नही दी जाएगी ।और उसे कहा कि रोज खाना खाने से पहले 5 रु मुझे दिए जाए तभी आपको खाना मिलेगा।ष्याम बहुत परेषान हो गया उसने बहुत सोचा कि रोज के 5 रु कहा से आएगे।फिर एक दिन तो वह अपने दोस्त से 5 रु लेकर अपने घर गया। खाना खाने से पहले श्याम के पिता ने उससे वादे के 5 रु मांगे उसने उसके दोस्त द्वारा दिए गए पैसे अपने पिता को दिए।पिता ने उसे भोजन करने की अनुमति दे दी । ओर उसके दिए हुए 5 रु कुए मे फेंक दिए। दूसरे दिन श्याम फिर उधारी कर 5रु ले आया फिर पिता ने उसके दिए हुए 5 रु कुए मे फेंक दिए।यह सिलसिला बहुत दिनो तक चलता रहा फिर श्याम  को भी उधार लेना अच्छा नही लगता था।एक दिन श्याम को कही से पैसे नही मिले ।उसने दूर देखा कि कुछ लोग बोझा उठा रहे थे उसने सोचा कि मैं भी आज कुछ मेहनत करके पैसे घर लेके जाउगा। उस दिन उसे उसकी मेहनत के 5 रु मिले और वह खुषी -खुषी घर आया । उसने वही खाने के पहले अपने 5रु अपने पिता को दिए और पिता ने फिर 5 रु कुए मे फेंक दिए। उस दिन श्याम को बहुत गुस्सा आया उसने अपने पिता से लड़ाई की ओर कहा कि आपने मेरी मेहनत के 5 रु क्यों कुए मे फेंके तब पिता ने उसे प्यार से समझाया और कहा कि अपनी मेहनत का पैसा तु बरबाद नही करना चाहता था, वही जब तू किसी से उधार लाता था तो आसानी से कुए मे फेंकने पर भी पेट भर भोजन कर लेता था।आज तुझे अपनी मेहनत का कमाया हुआ पैसा का मोल समझ मे आया।ष्याम को अपनी गलती का अहसास हुआ और वह अपने परिवार पर खर्चा करने लगा। और उसने अपने और अपने परिवार का नाम रोषन किया।
 
जीवन मे फिजूल दूसरो की कमाई पर खाने से अच्छा है अपनी मेहनत का खाया जाए।जिससे हमे अपने और अपनो के सामने कभी शर्मींदगी महसूस ना हो , और निरंतर आगे बढ़ते चले जाए।
 
 
 
एक बच्चे की कहानी
एक बच्चा था उसकी माँ उसे रोज -रोज स्कूल से आने के बाद पढ़ाई करने के लिए बोलती तो उस बालक का जवाब होता है कि माँ मैं परीक्षा के समय पढ़ूगा । अब यह सुनकर उसकी माँ अधिक चिंता में आ गयी कि यदि इसने पढ़ाई नही की तो यह परीक्षा मे पीछे रह जाएगा।
 
रोज -रोज यही सब देखने के बाद एक दिन उसने एक उपाय सोचा कि आज जैसे ही मेरा बेटा स्कूल से आएगा मैं उसे रोज की तरह पढ़ाई की याद दिलाऊँगी।
 
जैसे ही बालक स्कूल से आया , उसकी माँ ने उसे पढ़ने के लिए कहा तो उसने फिर वही जवाब दिया कि परीक्षा के समय पढ़ूगा तब उसकी माँ ने कहा -’बेटा आज मैने खीर बनाई है।
वह सुनकर बालक बहुत खुष हुआ ओर बोला जल्दी से दो माँ मुझे खीर खाना है। तब उसकी माँ ने दस कटोरी खीर उसके सामने रख दी  और कहा सब की सब खीर तुझे आज ही खाना है।तभी बेटा घबराकर बोला माँ कैसी बात कर रही हो, मेरा एक साथ इतनी खीर खाना उचित नही है।मुझे इसे पचाने मे कठिनाई होगी । तब उसकी माँ ने कहा बेटा पढ़ाई के लिये भी इसी प्रकार सोचो । तब उसे यह बात समझ आयी और वह रोज उसकी माँ के कहे अनुसार आते ही पढ़ाई करने लगा। और उसकी माँ ने  बात बताई कि बेटा परीक्षा मे अच्छे अंक लाने के लिये अभी से पढ़ना होगा ।
 
उसी प्रकार जैसे हम पूरी उम्र कमाते है ताकि वृद्ध अवस्था किसी मे किसी के आगे हाथ ना फैलाने पढ़े।